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सूक्त 131

131.1

खिलानि ।

आमि॑नोनि॒ति भ॑द्यते ॥१॥

131.2

तस्य॑ अनु॒ निभ॑ञ्जनम् ॥२॥

131.3

वरु॑णो॒ याति॒ वस्व॑भिः ॥३॥

131.4

श॒तं वा॒ भार॑ती॒ शवः॑ ॥४॥

131.5

श॒तमा॒श्वा हि॑र॒ण्ययाः॑ । श॒तं र॒थ्या हि॑र॒ण्ययाः॑ ।
श॒तं कु॒था हि॑र॒ण्ययाः॑ । श॒तं नि॒ष्का हि॑र॒ण्ययाः॑ ॥५॥

131.6

अह॑ल कुश वर्त्तक ॥६॥

131.7

श॒फेन॑ इ॒व ओ॑हते ॥७॥

131.8

आय॑ व॒नेन॑ती॒ जनी॑ ॥८॥

131.9

वनि॑ष्ठा॒ नाव॑ गृ॒ह्यन्ति॑ ॥९॥

131.10

इ॒दं मह्यं॒ मदू॒रिति॑ ॥१०॥

131.11

ते वृ॒क्षाः स॒ह ति॑ष्ठति ॥११॥

131.12

पाक॑ ब॒लिः ॥१२॥

131.13

शक॑ ब॒लिः ॥१३॥

131.14

अश्व॑त्थ॒ खदि॑रो ध॒वः ॥१४॥

131.15

अर॑दुपरम ॥१५॥

131.16

शयो॑ ह॒त इ॑व ॥१६॥

131.17

व्याप॒ पूरु॑षः ॥१७॥

131.18

अदू॑हमि॒त्यां पूष॑कम् ॥१८॥

131.19

अत्य॑र्ध॒र्च प॑र॒स्वतः॑ ॥१९॥

131.20

दौव॑ ह॒स्तिनो॑ दृ॒ती ॥२०॥

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