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अथर्ववेद 127.3

ए॒ष इ॒षाय॑ मामहे श॒तं नि॒ष्कान् दश॒ स्रजः॑ ।
त्रीणि॑ श॒तान्यर्व॑तां स॒हस्रा॒ दश॒ गोना॑म् ॥३॥

पूरा अध्याय