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अथर्ववेद 127.14

उप॑ नो न रमसि॒ सूक्ते॑न॒ वच॑सा व॒यं भ॒द्रेण॒ वच॑सा व॒यम्।
वना॑दधिध्व॒नो गि॒रो न रि॑ष्येम क॒दा च॒न ॥१४॥

पूरा अध्याय