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अथर्ववेद 127.13

नेमा इ॑न्द्र॒ गावो॑ रिष॒न् मो आ॒सां गोप॑ रीरिषत्।
मासा॑म॒मित्र॒युर्जन॒ इन्द्र॒ मा स्ते॒न ई॑शत ॥१३॥

पूरा अध्याय