ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 110110.3अथर्ववेद 110.3त्रिक॑द्रुकेषु॒ चेत॑नं दे॒वासो॑ य॒ज्ञम॑त्नत । तमिद् व॑र्धन्तु नो॒ गिरः॑ ॥३॥पिछलापूरा अध्याय