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अथर्ववेद 44.5

सिन्धो॒र्गर्भो॑ऽसि वि॒द्युतां॒ पुष्प॑म्।
वातः॑ प्रा॒णः सूर्य॒श्चक्षु॑र्दि॒वस्पयः॑ ॥५॥

पूरा अध्याय