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अथर्ववेद 44.4

प्राण॑ प्रा॒णं त्रा॑य॒स्वासो॒ अस॑वे मृड ।
निरृ॑ते॒ निरृ॑त्या नः॒ पाशे॑भ्यो मुञ्च ॥४॥

पूरा अध्याय