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अथर्ववेद 28.5

भि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे भि॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।
भि॒न्द्धि मे॒ सर्वान् दु॒र्हार्दो॑ भि॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे ॥५॥

पूरा अध्याय