ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 19सूक्त 2828.4अथर्ववेद 28.4भि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑नां॒ हृद॑यः द्विष॒तां म॑णे । उ॒द्यन्त्वच॑मिव॒ भूम्याः॒ शिर॑ ए॒षा वि पा॑तय ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय