ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 16सूक्त 55.1अथर्ववेद 5.1वि॒द्म ते॑ स्वप्न ज॒नित्रं॒ ग्राह्याः॑ पु॒त्रोऽसि य॒मस्य॒ कर॑णः ॥१॥अगलापूरा अध्याय