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अथर्ववेद 2.21

इ॒रा पुं॑श्च॒ली हसो॑ माग॒धो वि॒ज्ञानं॒ वासोऽह॑रु॒ष्णीषं॒ रात्री॒ केशा॒
हरि॑तौ प्रव॒र्तौ क॑ल्म॒लिर्म॒णिः ॥२१॥

पूरा अध्याय