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अथर्ववेद 1.46

उ॒र्वीरा॑सन् परि॒धयो॒ वेदि॒र्भूमि॑रकल्पत ।
तत्रै॒ताव॒ग्नी आध॑त्त हि॒मं घ्रं॒सं च॒ रोहि॑तः ॥४६॥

पूरा अध्याय