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अथर्ववेद 1.45

सूर्यो॒ द्यां सूर्यः॑ पृथि॒वीं सूर्य॒ आपोऽति॑ पश्यति ।
सूर्यो॑ भू॒तस्यैकं॒ चक्षु॒रा रु॑रोह॒ दिवं॑ म॒हीम् ॥४५॥

पूरा अध्याय