ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 12सूक्त 11.33अथर्ववेद 1.33याव॑त् तेऽभि वि॒पश्या॑मि॒ भूमे॒ सूर्ये॑ण मे॒दिना॑ । ताव॑न्मे॒ चक्षु॒र्मा मे॒ष्टोत्त॑रामुत्तरां॒ समा॑म् ॥३३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय