ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 1सूक्त 2121.3अथर्ववेद 21.3वि रक्षो॒ वि मृधो॑ जहि वि वृ॒त्रस्य॒ हनू॑ रुज । वि म॒न्युमि॑न्द्र वृत्रहन्न॒मित्र॑स्याभि॒दास॑तः ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय