ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 1सूक्त 2121.2अथर्ववेद 21.2वि न॑ इन्द्र॒ मृधो॑ जहि नीचा॒ य॑च्छ पृतन्य॒तः । अ॒ध॒मं ग॑मया॒ तमो॒ यो अ॒स्माँ अ॑भि॒दास॑ति ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय