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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 9.21

आयु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पतां प्रा॒णो य॒ज्ञेन॑ कल्पतां॒ चक्षु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पतातां॒ᳪ श्रोत्रं॑ य॒ज्ञेन॑ कल्पतां॒ पृ॒ष्ठं य॒ज्ञेन॑ कल्पतां॒ य॒ज्ञो य॒ज्ञेन॑ कल्पताम् ।
प्र॒जाप॑तेः प्र॒जा अ॑भूम॒ स्व॒र्देवा अगन्मा॒मृता॑ अभूम ॥२१॥

पूरा अध्याय