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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 9.19

आ मा॒ वाज॑स्य प्रस॒वो ज॑गम्या॒देमे द्यावा॑पृथि॒वी वि॒श्वरू॑पे ।
आ मा॑ गन्तां पि॒तरा॑ मा॒तरा॒ चा मा॒ सोमो॑ अमृत॒त्वेन॑ गम्यात् ।
वाजि॑नो वाजजितो॒ वाज॑ᳪ ससृ॒वाᳪसो॒ बृह॒स्पते॑र्भा॒गमव॑जिघ्रत निमृजा॒नाः ॥१९॥

पूरा अध्याय