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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 5.24

स्व॒राड॑सि सपत्न॒हा स॑त्र॒राड॑स्यभिमाति॒हा ज॑न॒राड॑सि रक्षो॒हा स॑र्व॒राड॑स्यमित्र॒हा ॥२४॥

पूरा अध्याय