ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन)अध्याय 44.5शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 4.5आ वो॑ देवास ईमहे वा॒मं प्र॑य॒त्य॒ध्व॒रे । आ वो॑ देवास आ॒शिषो॑ य॒ज्ञिया॑सो हवामहे ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय