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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 4.5

आ वो॑ देवास ईमहे वा॒मं प्र॑य॒त्य॒ध्व॒रे । आ वो॑ देवास आ॒शिषो॑ य॒ज्ञिया॑सो हवामहे ॥५॥

पूरा अध्याय