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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 39.4

मन॑स॒ः काम॒माकू॑तिं वा॒चः स॒त्यम॑शीय । प॒शू॒नाᳪ रू॒पमन्न॑स्य॒ रसो॒ यश॒ः श्रीः श्र॑यतां॒ मयि॒ स्वाहा॑ ॥४॥

पूरा अध्याय