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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 37.21

अह॑ः के॒तुना॑ जुषताᳪ सु॒ज्योति॒र्ज्योति॑षा॒ स्वाहा॑ ।
रात्रि॑ः के॒तुना॑ जुषताᳪ सु॒ज्योति॒र्ज्योति॑षा॒ स्वाहा॑ ॥२१॥

पूरा अध्याय