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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 35.14

उद्व॒यं तम॑स॒स्परि॒ स्वः पश्य॑न्त॒ उत्त॑रम् ।
दे॒वं दे॑व॒त्रा सूर्य॒मग॑न्म॒ ज्योति॑रुत्त॒मम् ॥१४॥

पूरा अध्याय