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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 34.28

उ॒भा पि॑बतमश्विनो॒भा न॒ः शर्म॑ यच्छतम् । अ॒वि॒द्रि॒याभि॑रू॒तिभि॑ः ॥२८॥

पूरा अध्याय