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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 34.15

इडा॑यास्त्वा प॒दे व॒यं नाभा॑ पृथि॒व्या अधि॑ ।
जात॑वेदो॒ निधी॑म॒ह्यग्ने॑ ह॒व्याय॒ वोढ॑वे ॥१५॥

पूरा अध्याय