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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 33.92

दि॒वि पृ॒ष्टो अ॑रोचता॒ग्निर्वै॑श्वान॒रो बृ॒हन् ।
क्ष्मया॑ वृधा॒न ओज॑सा॒ चनो॑हितो॒ ज्योति॑षा बाधते॒ तम॑ः ॥९२॥

पूरा अध्याय