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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 33.89

प्रैतु॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॒ः प्र दे॒व्ये॒तु सू॒नृता॑ । अच्छा॑ वी॒रं नर्यं॑ प॒ङ्क्तिरा॑धसं दे॒वा य॒ज्ञं न॑यन्तु नः ॥८९॥

पूरा अध्याय