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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 33.81

इ॒मा उ॑ त्वा पुरूवसो॒ गिरो॑ वर्धन्तु॒ या मम॑ ।
पा॒व॒कव॑र्णा॒ः शुच॑यो विप॒श्चितो॒ऽभि स्तोमै॑रनूषत ॥८१॥

पूरा अध्याय