Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 33.54

दे॒वेभ्यो॒ हि प्र॑थ॒मं य॒ज्ञिये॑भ्योऽमृत॒त्वᳪ सु॒वसि॑ भा॒गमु॑त्त॒मम् ।
आदिद्दा॒मान॑ᳪ सवित॒र्व्यू॒र्णुषेऽनूची॒ना जी॑वि॒ता मानु॑षेभ्यः ॥५४॥

पूरा अध्याय