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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 30.3

विश्वा॑नि देव सवितर्दुरि॒तानि॒ परा॑ सुव ।
यद्भ॒द्रं तन्न॒ आ सु॑व ॥३॥

पूरा अध्याय