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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 30.19

प्र॒ति॒श्रुत्का॑या अर्त॒नं घोषा॑य भ॒षमन्ता॑य बहुवा॒दिन॑मन॒न्ताय॒ मूक॒ᳪ शब्दा॑याडम्बराघा॒तं मह॑से वीणावा॒दं क्रोशा॑य तूणव॒ध्मम॑वरस्प॒राय॑ शङ्ख॒ध्मं वना॑य वन॒पम॒न्यतो॑रण्याय दाव॒पम् ॥१९॥

पूरा अध्याय