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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 29.18

अत्रा॑ ते रू॒पमु॑त्त॒मम॑पश्यं॒ जिगी॑षमाणमि॒ष आ प॒दे गोः ।
य॒दा ते॒ मर्तो॒ अनु॒ भोग॒मान॒डादिद् ग्रसि॑ष्ठ॒ ओष॑धीरजीगः ॥१८॥

पूरा अध्याय