ग्रंथशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन)अध्याय 2727.43शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 27.43पा॒हि नो॑ अग्न॒ एक॑या पा॒ह्युत द्वि॒तीय॑या । पा॒हि गी॒र्भिस्ति॒सृभि॑रूर्जां पते पा॒हि च॑त॒सृभि॑र्वसो ॥४३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय