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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 27.35

अ॒भि त्वा॑ शूर नोनु॒मोऽदु॑ग्धा इव धे॒नव॑ः ।
ईशा॑नम॒स्य जग॑तः स्व॒र्दृश॒मीशा॑नमिन्द्र त॒स्थुष॑ः ॥३५॥

पूरा अध्याय