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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 26.21

अ॒भि य॒ज्ञं गृ॑णीहि नो॒ ग्नावो॒ नेष्ट॒ः पिब॑ ऋ॒तुना॑ ।
त्वᳪ हि र॑त्न॒धा असि॑ ॥२१॥

पूरा अध्याय