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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 23.20

ता उ॒भौ च॒तुर॑ः प॒दः सं॒प्रसा॑रयाव स्व॒र्गे लो॒के प्रोर्णु॑वाथां॒ वृषा॑ वा॒जी रे॑तो॒धा रेतो॑ दधातु ॥२०॥

पूरा अध्याय