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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 22.34

एक॑स्मै॒ स्वाहा॒ द्वाभ्या॒ᳪ स्वाहा॑ श॒ताय॒ स्वाहैक॑शताय॒ स्वाहा॒ व्यु॒ष्ट्यै॒ स्वाहा॑ स्व॒र्गाय॒ स्वाहा॑ ॥३४॥

पूरा अध्याय