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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 22.32

वाजा॑य॒ स्वाहा॑ प्रस॒वाय॒ स्वाहा॑ ऽपि॒जाय॒ स्वाहा॒ क्रत॑वे॒ स्वाहा॒ स्वः स्वाहा॑ मू॒र्ध्ने स्वाहा॑ व्यश्नु॒विने॒ स्वाहा ऽन्त्या॑य॒ स्वाहा ऽन्त्या॑य भौव॒नाय॒ स्वाहा॒ भुव॑नस्य॒ पत॑ये॒ स्वाहा ऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑ प्र॒जाप॑तये॒ स्वाहा॑ ॥३२॥

पूरा अध्याय