शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 22.30
अस॑वे॒ स्वाहा॒ वस॑वे॒ स्वाहा॑ वि॒भुवे॒ स्वाहा॒ विव॑स्वते॒ स्वाहा॑ गण॒श्रिये॒ स्वाहा॑ ग॒णप॑तये॒ स्वाहा॑ ऽभि॒भुवे॒ स्वाहा ऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑ शू॒षाय॒ स्वाहा॑ सᳪस॒र्पाय॒ स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ ज्योति॑षे॒ स्वाहा॑ मलिम्लु॒चाय॒ स्वाहा॒ दिवा॑ प॒तय॑ते॒ स्वाहा॑ ॥३०॥