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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 21.40

होता॑ यक्षद॒ग्निᳪ स्वाहाऽऽज्य॑स्य स्तो॒काना॒ᳪ स्वाहा॒ मेद॑सां॒ पृथ॒क् स्वाहा॒ छाग॑म॒श्विभ्या॒ᳪ स्वाहा॑ मे॒षᳪ सर॑स्वत्यै॒ स्वाह॑ ऋष॒भमिन्द्रा॑य सि॒ᳪहाय॒ सह॑स इन्द्रि॒यᳪ स्वाहा॒ऽग्निं न भे॑ष॒जᳪ स्वाहा॒ सोम॑मिन्द्रि॒यᳪ स्वाहेन्द्र॑ᳪ सु॒त्रामा॑ण सवि॒तारं॒ वरु॑णं भि॒षजां॒ पति॒ᳪ स्वाहा॒ वन॒स्पतिं॑ प्रि॒यं पाथो॒ न भे॑ष॒जᳪ स्वाहा॑ दे॒वा आ॑ज्य॒पा जु॑षा॒णो अ॒ग्निर्भे॑ष॒जं पय॒ः सोम॑ः परि॒स्रुता॑ घृ॒तं मधु॒ व्यन्त्वाज्य॑स्य॒ होत॒र्यज॑ ॥४०॥

पूरा अध्याय