Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 21.36

होता॑ यक्ष॒द्दैव्या॒ होता॑रा भि॒षजा॒ऽश्विनेन्द्रं॒ न जागृ॑वि॒ दिवा॒ नक्तं॒ न भे॑ष॒जैः शूष॒ᳪ सर॑स्वती भि॒षक् सीसे॑न दुह इन्द्रि॒यं पय॒ः सोम॑ः परि॒स्रुता॑ घृ॒तं मधु॒ व्यन्त्वाज्य॑स्य॒ होत॒र्यज॑ ॥३६॥

पूरा अध्याय