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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 20.86

म॒हो अर्ण॒ः सर॑स्वती॒ प्र चे॑तयति के॒तुना॑ । धियो॒ विश्वा॒ वि रा॑जति ॥८६॥

पूरा अध्याय