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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 20.50

त्रा॒तार॒मिन्द्र॑मवि॒तार॒मिन्द्र॒ᳪ हवे॑ – हवे सु॒हव॒ᳪ शूर॒मिन्द्र॑म् ।
ह्वया॑मि श॒क्रं पु॑रुहू॒तमिन्द्र॑ᳪ स्व॒स्ति नो॑ म॒घवा॑ धा॒त्विन्द्र॑ः ॥५०॥

पूरा अध्याय