शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 2.20
अग्ने॑ऽदब्धायोऽशीतम पा॒हि मा॑ दि॒द्योः पा॒हि प्रसि॑त्यै पा॒हि दुरि॑ष्टयै पा॒हि दु॑रद्म॒न्या अ॑वि॒षं न॑ः पि॒तुं कृ॑णु
सु॒षदा॒ योनौ॒ स्वाहा॒ वाड॒ग्नये॑ संवे॒शप॑तये॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै यशोभ॒गिन्यै॒ स्वाहा॑ ॥२०॥
अग्ने॑ऽदब्धायोऽशीतम पा॒हि मा॑ दि॒द्योः पा॒हि प्रसि॑त्यै पा॒हि दुरि॑ष्टयै पा॒हि दु॑रद्म॒न्या अ॑वि॒षं न॑ः पि॒तुं कृ॑णु
सु॒षदा॒ योनौ॒ स्वाहा॒ वाड॒ग्नये॑ संवे॒शप॑तये॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै यशोभ॒गिन्यै॒ स्वाहा॑ ॥२०॥