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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 19.54

त्वᳪ सो॑म पि॒तृभि॑ः संविदा॒नोऽनु॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ त॑तन्थ ।
तस्मै॑ त इन्दो ह॒विषा॑ विधेम व॒यᳪ स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम् ॥५४॥

पूरा अध्याय