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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 18.77

त्वं य॑विष्ठ दा॒शुषो॒ नॄँः पा॑हि शृणु॒धी गिर॑ः । रक्षा॑ तो॒कमु॒त त्मना॑ ॥७७॥

पूरा अध्याय