Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 18.57

इ॒ष्टो अ॒ग्निराहु॑तः पिपर्तु न इ॒ष्टᳪ ह॒विः । स्व॒गेदं दे॒वेभ्यो॒ नम॑ः ॥५७॥

पूरा अध्याय