Utshovऐप डाउनलोड करें

शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 18.54

दि॒वो मू॒र्धाऽसि॑ पृथि॒व्या नाभि॒रूर्ग॒पामोष॑धीनाम् । वि॒श्वायु॒ः शर्म॑ स॒प्रथा॒ नम॑स्प॒थे ॥५४॥

पूरा अध्याय