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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 17.85

स्वत॑वाँश्च प्रघा॒सी च॑ सान्तप॒नश्च॑ गृहमे॒धी च॑ । क्री॒डी च॑ शा॒की चो॑ज्जे॒षी ॥८५॥

पूरा अध्याय