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शुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन) 17.45

अव॑सृष्टा॒ परा॑ पत॒ शर॑व्ये॒ ब्रह्म॑सᳪशिते । गच्छा॒मित्रा॒न् प्र प॑द्यस्व॒ माऽमीषां॒ कं च॒नोच्छि॑षः ॥४५॥

पूरा अध्याय